Tuesday, August 12, 2014

मेरे आईने की परछाइयां

 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
मेरे बादल मुझे ले चलो
उडा पहाड़ों की बस्ती में
देखू तो किस तरह वहाँ पर
लोग सिमट जाते बारिश में
माचिस के डिबिया से सपने ...
तीली जैसे जल जाते हैं
और रौशनी में तीली की
जीवन लम्बे कट जाते हैं ....

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